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Video: कुख्यात नक्सली पापा राव समेत 18 नक्सलियों ने किया सरेंडर, 8 AK-47 समेत कई हथियार भी पुलिस को सौंपा

 Edited By: Mangal Yadav @MangalyYadav
 Published : Mar 24, 2026 07:10 pm IST,  Updated : Mar 24, 2026 07:31 pm IST

वरिष्ठ माओवादी कमांडर पापा राव मंगलवार को अपने दल के सदस्यों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया है। सरेंडर करने वालों में सात महिला नक्सली भी शामिल है।

 सरेंडर करने जाते नक्सली- India TV Hindi
सरेंडर करने जाते नक्सली Image Source : REPORTER

बीजापुरः कुख्यात नक्सली कमांडर पापा राव समेत 18 नक्सलियों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। सरेंडर करने वालों में 11 पुरुष और 7 महिला नक्सली शामिल हैं। जानकारी के मुताबिक, दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी मेंबर पापा राव के साथ 11 पुरुष और 7 महिला नक्सली  समेत कुल 18 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया। ये लोग अपने साथ 8 AK-47 एवम अन्य हथियार भी लेकर पहुंचे। नक्सलियों में DKSZC मेंबर पापा राव समेत डिवीसीएम और एसीएम रैंक के नक्सली शामिल हैं। 

पापा राव के ख़िलाफ़ 45 मामले दर्ज 

माना जाता है कि पापा राव की उम्र 55 से 60 साल के बीच है। वह स्कूल छोड़कर नक्सल आंदोलन में शामिल हो गया था। माना जाता है कि वह कई बड़े नक्सल हमलों की साज़िश रचने में शामिल रहा है। बीजापुर ज़िले के पुलिस अधीक्षक जितेंद्र कुमार यादव ने बताया कि पापा राव के ख़िलाफ़ 45 मामले दर्ज हैं, जिनमें 2010 में ताड़मेटला में हुए सबसे बड़े नक्सल हमले से जुड़ा मामला भी शामिल है। उस हमले में घात लगाकर किए गए वार में 76 जवान शहीद हो गए थे। वह जनवरी 2025 में नक्सलियों द्वारा किए गए पिछले बड़े हमले में भी शामिल था, जिसमें बीजापुर के अंबली में आठ सुरक्षाकर्मी और एक आम नागरिक (ड्राइवर) मारे गए थे।

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नक्सल ऑपरेशन के अतिरिक्त महानिदेशक विवेकानंद सिन्हा ने कहा कि छत्तीसगढ़ में इस संगठन में बचा हुआ वह आखिरी महत्वपूर्ण नक्सल नेता था। पापा राव की गिरफ़्तारी पर 25 लाख रुपये का इनाम घोषित था। राव प्रतिबंधित संगठन CPI (माओवादी) की राज्य-स्तरीय सर्वोच्च संस्था दंडकारण्य स्पेशल ज़ोनल कमेटी (DKSZC) का सदस्य था। वह साउथ बस्तर ज़ोनल ब्यूरो कमेटी का सचिव भी रहा।

मुठभेड़ में हर बार बच जाता था पापा राव

पापा राव लगभग 25 वर्षों से जंगलों में सक्रिय था और कई बार सुरक्षा बलों के साथ उसकी मुठभेड़ हुई, लेकिन हर बार वह बच निकला। बस्तर संभाग और आसपास के राज्यों के कुछ हिस्सों में माओवादी गतिविधियों को अंजाम देने वाले डीकेएसजेडसी को इस प्रतिबंधित संगठन की सबसे मजबूत इकाई माना जाता था। पिछले दो दशकों में सुरक्षा बलों पर कई जानलेवा हमले करने में इसकी अहम भूमिका रही है

 

रिपोर्ट- संजीव पचौरी 

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